Transistor क्या है और कैसे काम करता है

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ट्रांजिस्टर क्या है - What is Transistor in Hindi
ट्रांजिस्टर क्या है - What is Transistor in Hindi

दोस्तों आज हम बात करेंगे ट्रांजिस्टर की और जानेंगे ट्रांजिस्टर क्या है – What is Transistor in Hindi ये कैसे काम करता है, इसके Types और इसका इतिहास. दोस्तों आज के टाइम में तरह तरह के Gadgets और Mobile तो हम सभी Use करते है, साथ ही और भी तरह की चीज़े जैसे TV, Computer, Smartphone, Cars और भी पता नहीं क्या क्या चीजें, पर आज हम एक ऐसे डिवाइस के बारे में बात करने जा रहे है जो अगर ना होता तो आज की दुनिया जैसी हम जी रही है शायद ये वैसी बिलकुल नहीं हो पाती.

जी हाँ दोस्तों यहाँ आज मैं आपसे बात करने वाला हूँ ट्रांजिस्टर की ये एक ऐसी बहुत ही कमाल की टेक्नोलॉजी हमारे सामने आयी थी जिसके बाद हमारे पास जितनी भी बड़ी बड़ी electronic devices है. वो छोटी और बहुत छोटी होती चली गयी फिर चाहे वो Computer, Laptop, Smartphone या कुछ भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हो अगर ट्रांजिस्टर नहीं होता तो ये सब चीज़े इतनी छोटी नहीं बन पाती. दोस्तों वैसे आपने कभी न कभी स्कूल में या अगर आप एक इंजीनियर स्टूडेंट है तो अपने ट्रांजिस्टर के बारे में तो सुना ही होगा. तो चलिए जानते है ट्रांजिस्टर क्या है – What is Transistor in Hindi और ये कैसे काम करता है.

ट्रांजिस्टर क्या है – What is Transistor in Hindi

ट्रांजिस्टर एक ऐसी छोटी सी Electronic Hardware Device है जिसे Current, Voltage आदि Signals को Amplify करने (यानि बढ़ाने) के काम में लिया जाता है. ये Silicon और Germanium सेमीकंडक्टर मटिरिअल से बना होता है. ट्रांजिस्टर का अविष्कार 1947 में Bell नाम की लेबोरेटरी में किया गया था. ट्रांजिस्टर में कुल 3 टर्मिनल Emitter, Base और Collector होते है जोकि एक दूसरे से एक क्रम में जुड़े हुए होते है जिसमे Base बिलकुल बीच में एक छोटी सी परत में मौजूद होता है जबकि Emitter बिलकुल Right Side और Collector बिलकुल Left Side में मौजूद होता है. इस पुरे टर्मिनल को PN diode (Positive – Negative Diode) भी कहते है.

अगर और आसान भाषा में समझे तो ट्रांजिस्टर एक Switch की तरह है जो इलेक्ट्रॉनिक signals जैसे करंट, वोल्टेज आदि को Control (बंद या चालू), Regulate (कम या ज्यादा) करने के और system में जानकारी process करने के काम आता है. दिखने में इस छोटी सी चीज ने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया और टेक्नोलॉजी को नयी बुलंदियों पर पहुँचा दिया. ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल से ही पुराने time में जहाँ हम बड़ी बड़ी चीजे जैसे Telephone, Computer आदि का इतेमाल किया करते थे वो आज छोटे छोटे Smartphones और Laptop में बदल गए है.

Types of Transistor in Hindi

वैसे तो कई तरह के ट्रांजिस्टर होते है पर आज हम यहाँ सिर्फ Bipolar Junction Transistor के बारे में ही बात कर रहे है. आमतौर पर 2 तरह के standard (bipolar junction) ट्रांजिस्टर होते है.

  • NPN Transistor
  • PNP Transistor

आज के समय में अधिकतर NPN Transistor ही इस्तेमाल किये जाते है Bipolar Junction के आलावा एक और तरह का ट्रांजिस्टर होता है जिसे FET (Field Effective Transistor) कहते है इसके सर्किट बिलकुल अलग तरह के होते है.

Bipolar Junction के ट्रांजिस्टर में एक तरफ के ब्लॉक में एक तरफ n-type semiconductor और दूसरी तरफ P-type semiconductor होता है तो उसे NPN ट्रांजिस्टर कहते है ऐसे ही अगर एक तरफ के ब्लॉक में p-type हो और दूसरी तरफ n-type semiconductor हो तो उसे PNP ट्रांजिस्टर कहते है. आप इसे निचे दी गयी इमेज से बहुत ही आसानी से समझ सकते है.

NPN and PNP Transistor in Hindi
NPN and PNP Transistor in Hindi

इनमे arrow का निशान(symbol) current किस दिशा में जा रहा है ये बताता है. दोनों ही ट्रांजिस्टर में NPN और PNP में सिर्फ एक ही difference है current की direction का.

Terminals of Transistor in Hindi (सिरे)

जैसा की हमने ऊपर देखा की ट्रांजिस्टर के 3 Terminals (सिरे) होते है Emitter, Base और Collector. चलिए इन्हे और अच्छे से जानते है –

Emitter

इसके नाम से ही पता चलता है इसका काम चार्ज को emit यानि बहार निकलने का होता है. जिस block में सबसे जायदा Charge Carier(सर्किट में बहने वाले positive और negative चार्ज) मौजूद होते है उस block को Emitter कहते है ये हमेशा सर्किट में base के साथ forward biased (जिसमे करंट आगे की तरफ चलता है) में लगा होता है ताकि जायदा चार्ज को निकल सके और Base तक पहुँचा सके.

Collector

ट्रांजिस्टर में यह ब्लॉक Base से Charge Carier को इकट्ठा करने का काम करता है. ये हमेशा Base के साथ रिवर्स बायस ( पीछे की तरफ जुड़ा हुआ) में जुड़ा होता है इसका मुख्या काम बेस से जायदा चार्जेज को निकालने का होता है साथ ही ट्रांसिस्टए इसका ब्लॉक बेस और एमिटर से काफी बड़ा होता है.

Base

ट्रांजिस्टर का बीच का ब्लॉक Base कहलाता है base हमेशा ट्रांजिस्टर में 2 तरह के सर्किट बनता है एक जो Emitter के साथ होता है उसे Input सर्किट कहते है क्युकी emitter द्वारा ही चार्ज बेस तक आता है और दूसरा सर्किट collector के साथ जिसमे बेस द्वारा अधिक charge को बहार निकला जाता है इसे output circuit कहते है.

Transistor कैसे काम करता है (Working of PNP Transistor in Hindi)

इसमें diode को दोनों तरफ से अलग अलग बैटरी से जोड़ा जाता है और current दिया जाता है एक तरफ Battery-A का + पॉजिटिव टर्मिनल Emitter से कनेक्ट होता है और – नेगेटिव टर्मिनल ट्रांजिस्टर के Base से कनेक्ट होता है जबकि दूसरी तरफ की Battery-B का + पॉजिटिव टर्मिनल Base से कनेक्ट होता है और – नेगेटिव टर्मिनल ट्रांजिस्टर के Collector से कनेक्टेड होता है.

जब Battery-A से + पॉजिटिव करंट Emitter में जाता है तो Emitter के block में मौजूद + पॉजिटिव charge + पॉजिटिव करंट से दूर होने लगते है ऐसे में Emitter उन्हें बाहर निकलकर Base में भेजने लगता है. ऐसे में Base जोकि – नेगेटिव Charge लिए हुए होता है. उसमे – नेगेटिव charge को neutral यानि दोनों चार्ज को बराबर + positive charge को आगे की और collector में भेजने लगता है जब Collector में ये + पॉजिटिव जाता है तो बैटरी 2 का – नेगेटिव टर्मिनल इसे अपने और खीचता है इस तरह से ये charge पूरी circuit में घूमने लगता है और काम करता है.

History of Transistor in Hindi (इतिहास)

23 दिसंबर, 1947 को New Jersey के Murray Hill नाम की जगह में Bell Laboratory में ट्रांजिस्टर का सफल प्रदर्शन किया गया था. Bell Laboratory अमेरिकन टेलीफोन एंड टेलीग्राफ (AT & T) की Research शाखा है C Programming Language को भी वही develop किया गया था. ट्रांजिस्टर का आविष्कार का तीन व्यक्तियों जिनका नाम William Shockley, John Bardeen और Walter Brattain ने मिल कर किया था.

ट्रांजिस्टर क्या है - What is Transistor in Hindi
Scientists of Transistor in Hindi

Dallas जगह के टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स कंपनी ने पहली बार 1954 में पोर्टेबल रेडियो के लिए जंक्शन ट्रांजिस्टर का उत्पादन शुरू किया था फिर बादमे जापान की Sony Company को भी जल्द ही ट्रांजिस्टर बनाने का अधिकार मिल गया था और बाजार पूरी तरह से हावी हो गई 1960 में Sony ने Vaccum Tube के बजाय ट्रांजिस्टर का उपयोग करके टेलीविज़न सेट बनाना शुरू कर दिया था इसके बाद वैक्यूम ट्यूब की तकनीक पुरानी हो गई और ट्रांजिस्टर ही हर जगह काम में लिए जाने लगे थे तब से लेकर आज तक हर जगह ट्रांजिस्टर का ही इस्तामल किया जाता है.

Interesting Facts of Transistor in Hindi

  • Sonotone 1010 पहला कमर्शियल Earphone डिवाइस था जिसमे ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया गया था
  • सं1954 में पहला Radio बाजार में आया था जिसमे केवल 4 ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया था
  • एक IC में हज़ारो ट्रांजिस्टर मुजूद होते है
  • किसी भी कंप्यूटर को बिना IC के नहीं बनाया जा सकता है और किसी भी IC को बिना ट्रांजिस्टर नहीं बनाया जा सकता है
  • Intel कंपनी के पहले IC चिप में 2300 ट्रांजिस्टर थे जबकि आज Intel 7th Generation (i7) में 73 करोड़ ट्रांजिस्टर मौजूद है

Conclusion

तो दोस्तों आज हमने जाना की ट्रांजिस्टर क्या है – What is Transistor in Hindi ये कैसे काम करता है, Types of Transistor, इसकी History और Terminals. दोस्तों में आशा करता हूँ आपको मेरी यह जानकारी Transistor in Hindi आसानी से समझ आयी होगी अगर आपको इस जानकारी से रिलेटेड कोई सवाल पूछने है या आप चाहते है की मैं किसी जानकरी पर लिखू. तो आप मुझे नीचे Comment Box में लिख सकते है.

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What is the Transistor in Hindi

ट्रांजिस्टर एक ऐसी छोटी सी Electronic Hardware Device है जिसे Current, Voltage आदि Signals को Amplify करने (यानि बढ़ाने) के काम में लिया जाता है. ये Silicon और Germanium सेमीकंडक्टर मटिरिअल से बना होता है. ट्रांजिस्टर का अविष्कार 1947 में Bell नाम की लेबोरेटरी में किया गया था. ट्रांजिस्टर में कुल 3 टर्मिनल Emitter, Base और Collector होते है जोकि एक दूसरे से एक क्रम में जुड़े हुए होते है

Types of Transistor in Hindi

मुख्य रूप से Transistor दो तरह के होते है BJT (Bipolar Junction Transistor) और FET (Field Effective Transistor) फिर इनमे कई तरह के अलग अलग ट्रांजिस्टर होते है जैसे NPN, PNP आदि

1 COMMENT

  1. Deepak Vaishnav

    Thankyou so much sir pura smjh aa gya ye topic aage bhi late raho jankari aap

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