Harvard Mark 1 Computer क्या है

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Harvard Mark 1 Computer in Hindi Zone
What is Harvard Mark 1 Computer in Hindi Zone

Mark 1 दुनिया का पहला बिजली से चलने वाला Automatic Computer था. जो ENIAC और UNIVAC Computer से भी पहले आया था. इसे Dr. Howard H Aiken ने अपने चार साथी इंजीनियर के साथ सं1944 में इसे पूरी तरह से डिज़ाइन और डेवेलप किया था. चलिए अब डिटेल में जानते है Mark 1 Computer in Hindi के बारे में.

इसे शुरुआत में संख्यात्मक और वकल समीकरण के सवालों को हल करने के लिए बनाया गया था. ये कंप्यूटर करीब 15 मीटर तक लम्बा था और इसके वायर्स जोकि Parts of Computer को एक दूसरे से जोड़ते थे वो करीब 51Feet तक लम्बे थे. देखने में ये कंप्यूटर काफी ज्यादा बड़ा और काम करने में काफी slow था. ये 3 calculation (Addition और Subtraction) को करने में लगभग 1 second तक का समय लगता था. ये एक गुणा (Multiply) करने में लगभग 6 सेकण्ड्स और एक भाग (Divide) करने में 16 सेकण्ड्स का समय लगता था.

इसका आधिकारिक नाम Automatic Sequence Controlled Calculator (ASCC) था, बाद में हार्वर्ड विश्विधालय के कर्मचारियों द्वारा इसका नाम Mark 1 रखा गया.

History of Mark 1 Computer in Hindi – इतिहास

मार्क 1 कंप्यूटर World War – II के समय पहली बार “यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका (USA)” में बनाया गया था। पहली बार इस computer की कल्पना हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिक्स प्रोफेसर डॉक्टर होवार्ड आइकन ने की थी। बाद मे इसे IBM कंपनी के इंजीनियरो द्वारा इसे पूरी तरह समझने और पढ़ने के बाद IBM के चैयरमेन Thomas Watson Sr ने इस project को पूरी तरह से सुनिश्चित कर दिया और फिर इसे IBM द्वारा अपने “इंडिकोट प्लांट” में डिज़ाइन एंड डेवेलप किया गया था. इस कंप्यूटर को बनाने का खर्च भी IBM कंपनी द्वारा ही फण्ड किया गया था.

ये कंप्यूटर लगभग 50 फुट चौड़ा और 8 फुट लम्बा था, इसमें 75000 हज़ार छोटे छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे थे और इसका वजन करीब 500kg था। इसे सं1944 में पहली बार हार्वर्ड विश्वविधालय को दिया गया था इसी विश्वविद्यालय में इसका नाम Mark 1 रखा गया था. हालाँकि मार्क 1 कंप्यूटर खास तौर पर US नेवी के लिए बनाया गया था.

Working – मार्क 1 कंप्यूटर कैसे काम करता था?

इसमें कुल 24 अलग अलग switch हुआ करते थे जिसके द्वारा मैन्युअली यानि खुद से Data को इसमें enter किया जाता था इसमें कुल 72 संख्या तक को आसानी से Computer Memory में स्टोर किया जा सकता था ये एक सेकंड में 3 जोड़ और घटने के सवालों को हल कर सकता था ये ट्रिग्नोमेट्री के सवालों को हल करने के लिए कुल 1 मिनट तक का समय लेता था.

ये अपने 24 चैनेलो से पंचिंग टेप द्वारा input लेता था सबसे पहले ये वर्तमान instructions को एक्सेक्यूटे करता और फिर आगे के बाकि instructions को एक्सेक्यूटे करता था. इसमें डाटा और इंस्ट्रक्शंस हार्वर्ड आर्किटेक्चर द्वारा अलग होता था.

इसके आलावा इसमें प्रोग्रामर्स को मैन्युअली प्रोग्राम्स को रोलिंग पेपर शीट पर टाइप करना होता था, जोकि काफी बड़े प्रोग्राम्स हुआ करते थे. मार्क 1 कंप्यूटर के सबसे प्रोग्रामर थे – रिचर्ड मिल्टन बलोच, ग्रेस हूपर और रोबर्ट कैम्पबेल इसके अलावा इसमें IBM के कई कर्मचारी भी इस मशीन को ऑपरेट करने के लिए रखे गए थे, जिन्हे इस मशीन पर काम करने से पहले US नेवी को ज्वाइन करना अनिवार्य होता था.

Conclusion

तो दोस्तों मैं आशा करता हूँ आपको मेरा ये ब्लॉग Harvard Mark 1 Computer in Hindi बड़ी ही आसानी से और पूरी तरह समझ आया होगा. इसके अलावा अगर आपको इस ब्लॉग में कोई और doubt है, तो आप मुझे नीचे comment box में बे झिझक पूछ सकते है और मैं कोशिश करुंगा की आपके सवालों के जवाब आपको जल्द जल्द से दूँ. इसके अलावा दोस्तों आप हमारे नई ब्लोग्स की updates पाने के लिए हमे हमारे सोशल मीडिया Facebook, Twitter, Instagram पर भी Follow कर सकते है.

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